- इस वर्ग की मिट्टिया प्राचीन युग के ग्रेनाइट शिष्ट चट्टानों से विकसित हुई है|
- छत्तीसगढ़ में इसका स्थानीय नाम मटासी है|
- ऐसा भी माना जाता है कि इस मिट्टी की उत्पत्ति गोंडवाना चट्टानों से हुई है|
- छत्तीसगढ़ राज्य में सर्वाधिक 55-60% भाग पर यह मिट्टी पायी जाती है|
- पूर्वी बघेलखण्ड का पठार, जशपुर-सामरी पाट प्रदेश तथ महानदी बेसिन के अधिकांश भाग में यह मिटटी पायी जाती है|
- इस मिट्टी में बालू की मात्रा के अधिकता के कारण जलधारण क्षमता कम होती है|
- फसल उत्पादन की दृष्टि से यह मिट्टी कम उपजाऊ होती है|
- इस तरह के मिट्टी में चुना पत्थरों की अधिकता होती है, जो धान की फसल के लिए उपयुक्त है|
- इस मिटटी में आयरन ऑक्साइड की प्रधानता होती है तथा ऐलूमिना की मात्रा कम|
- यह मिट्टी फेरस ऑक्साईड के कारण लाल रंग तथा फेरिक ऑक्साइड के कारण पीला रंग दिखाई देती है|
- इस मिट्टी का PH मान 5.8- 8.4 के मध्य होता है|
- इस मिट्टी में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस तथा ह्यूमस की कमी होती है|
- इस मिट्टी को भारत में चावल मिटटी की संज्ञा दी गई है|
- इन मिट्टी में अन्य फसलों में तंबाकू, दलहन तथा तिलहन लिए प्रमुख होती है|
- कोरिया, सरगुजा, जशपुर, रायगढ़, धमतरी तथा महासमुंद आदि जिलों में इसकी प्रधानता है|
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